Poetry

ये अस्पताल

ये अस्पताल मुझे रेलवे स्टेशन सा लगता है,
यहाँ के अंजान लोगों में भी
कुछ जाना पहचाना सा लगता है!
भीड़ यहाँ भी कुछ स्टेशन सी होती है,
बेटे को देख माँ यहाँ भी रोती है,
यहाँ भी आने वाले मेहमान का इंतज़ार
मुस्कुरा कर होता है,
यहाँ भी जाने वाले के लिए
हर शख्स रोता है।
यहाँ भी रुकने को
कोई नहीं आता,
यहाँ की भीड़ देख कर
मन है घबराता।
सगे संबंधी यहाँ भी
इंतज़ार करते हैं,
सब कुशल मंगल हो जाये
दुआएं हज़ार करते है,
रेलवे कर्मी की जगह डॉक्टर-नर्स का पीछा किया करते है
समय समय पर उनसे सवाल किया करते हैं।
गर्मी ठण्ड या बरसात की सुध ना होती किसी को
करीब से देख सकते हैं यहाँ ज़िन्दगी को।
ये अस्पताल मुझे रेलवे स्टेशन सा लगता है
भीड़ में बैठा हर अनजान
जाना पहचाना सा लगता है।

 

6 thoughts on “ये अस्पताल”

  1. A different approach to hospitals. Like it!!
    Hospital me logon Ka ek pain Ka rishta hota hai.
    People are more empathetic about each other.

    Like

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