Poetry

नमन आपको श्री अटल बिहारी।

राजनीति के प्रांगण में
एक माली था उस आंगन में
लालकृष्ण जी जिनके मित थे
भावपूर्ण उनके गीत थे!
सुंदर सुंदर फूलों से ना जाने सजाई थी उन्होंने कितनी क्यारी, (२)
अन्तिम क्षण में, सब फूलों को रुला गए वो अटल बिहारी।

मै उनकी बात करती हूं,
वो देश की बात करते थे
देश के लिए ही शायद वो पितामह,
धर्मराज से लड़कर,
एक और दिन, शर शैया पर लेटे थे।

राजनीति के आंगन में,
कांटों के विरोध उन्होंने
गर्जन की हुंकार से कई समेटे थे,
ताज्जुब है मुझे, (२)
एक भी विरोधी नजर ना आया,
जब वो शैय्या पर मौन लेटे थे ।

जब तक श्वास ली उन्होंने, जीवन का गीत गाया,
कदाचित मृत्यु भी प्रसन्न होगी,
अटल को है उसने पाया।

नूर और गुरूर, देशप्रेम में मग्रुर था,
राजधर्म के पालन के लिए, वो माली मशहूर था।
संयुक्त राष्ट्र में हिंदी की बगिया लगाई थी जिसने,
वो अटल राजनीति का कोहिनूर था।

होश संभाला था जब मैंने,
उस माली को शिखर पर देखा था,
सारे फूलों को साथ सींचने का,
प्रकम प्रबल देखा था।
जिसके राजतिलक की पूरे भारत ने की थी तय्यारी,(२)
नमन आपको श्री अटल बिहारी।

देह त्याग किया है जिसने
दोबारा कूच करने के लिए,
धैर्य रखो मित्रों,
काल के कपाल पर लिखकर,
बेशक लौट आएगा वो माली एक दिन,
अटल शून्य को भरने के लिए।

I have also tried to recite this poetry. Here’s the link. 🙂

Youtube

Share, subscribe and comment if you like it. 🙂

Advertisements

6 thoughts on “नमन आपको श्री अटल बिहारी।”

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s