Poetry, Uncategorized

क्यूंकि हम घर नहीं, मकान में रहते है!

पुराने खपड़े के घर में लंबे चौड़े आंगन हुआ करते है मटर के दानों के बीच घर की औरतों में नाजाने कितने किस्से पक्ते थे।   Watch me perform on this poetry . https://youtu.be/cXPj7DOuqO8

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Poetry

नमन आपको श्री अटल बिहारी।

राजनीति के प्रांगण में एक माली था उस आंगन में लालकृष्ण जी जिनके मित थे भावपूर्ण उनके गीत थे! सुंदर सुंदर फूलों से ना जाने सजाई थी उन्होंने कितनी क्यारी, (२) अन्तिम क्षण में, सब फूलों को रुला गए वो अटल बिहारी। मै उनकी बात करती हूं, वो देश की बात करते थे देश के… Continue reading नमन आपको श्री अटल बिहारी।

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कौन सा घर है उसका?

बिदाइ हुई थी जब उसकी मां ने कहा था, 'अपने संसार में सुखी रहना.'! बाबा ने कहा था, 'उस आंगन को सजा के रखना।' मन पूछ उठा, 'बचपन तो इस आंगन में बिताया था' मैं तो संसार को तो छोड़ कर जा रही थी, तो मां ने किस संसार कि बात कही? बिदाई की बेला,… Continue reading कौन सा घर है उसका?