Poetry

कौन सा घर है उसका?

बिदाइ हुई थी जब उसकी मां ने कहा था, 'अपने संसार में सुखी रहना.'! बाबा ने कहा था, 'उस आंगन को सजा के रखना।' मन पूछ उठा, 'बचपन तो इस आंगन में बिताया था' मैं तो संसार को तो छोड़ कर जा रही थी, तो मां ने किस संसार कि बात कही? बिदाई की बेला,… Continue reading कौन सा घर है उसका?

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ये अस्पताल

ये अस्पताल मुझे रेलवे स्टेशन सा लगता है, यहाँ के अंजान लोगों में भी कुछ जाना पहचाना सा लगता है! भीड़ यहाँ भी कुछ स्टेशन सी होती है, बेटे को देख माँ यहाँ भी रोती है, यहाँ भी आने वाले मेहमान का इंतज़ार मुस्कुरा कर होता है, यहाँ भी जाने वाले के लिए हर शख्स… Continue reading ये अस्पताल

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ये कैसा समाज है?

पिताजी को लड़की चाहिए, माँ को चाहिए लड़का इन दोनों खाँचो में मैं न जन्मा, तो समस्त समाज मुझपर भड़का। तिरस्कार भरी नज़रों से देख, "अलग हो तुम" कहते हैं, मेरे अपने ही मुझसे कटे कटे रहते हैं। परीक्षा में जो मैं त्रुटि कर आऊँ "तैयारी ही नहीं की होगी" के हज़ार ताने पाऊँ पर… Continue reading ये कैसा समाज है?